नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की 6 सदस्यों वाली स्पेशल बेंच ने सोमवार को 81,000 करोड़ रुपये के ग्रेट निकोबार मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी। एनजीटी ने अपने फैसले में कहा कि उन्हें प्रोजेक्ट को दी गई पर्यावरण मंजूरी में दखल देने का ''कोई अच्छा आधार'' नहीं मिला, क्योंकि प्रोजेक्ट की पर्यावरण मंजूरी में ''काफी सुरक्षा उपाय'' थे। एनजीटी चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव की अगुवाई वाली बेंच ने ''प्रोजेक्ट के रणनीतिक महत्व'' और उन मुद्दों पर भी ध्यान दिया, जिनसे एनजीटी के 2023 के आदेश के अनुसार, प्रोजेक्ट की एनवायरनमेंटल क्लीयरेंस पर फिर से विचार करने के लिए बनाई गई हाई-पावर्ड कमेटी ने निपटा था।
प्रोजेक्ट के लिए काटे जाएंगे 10 लाख पेड़
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 166 वर्ग किलोमीटर में फैले इस मेगा प्रोजेक्ट में 130 वर्ग किलोमीटर जंगल की जमीन का डायवर्जन और लगभग 10 लाख पेड़ों की कटाई शामिल है। सरकार इस मेगा प्रोजेक्ट के तहत एक ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, एक इंटीग्रेटेड टाउनशिप, एक सिविल और मिलिट्री एयरपोर्ट और एक 450-MVA गैस और सोलर पावर प्लांट का निर्माण करना चाहती है। केंद्र ने निकोबारी समुदाय की अपनी पुरखों की जमीन (जो 2004 की सुनामी में तबाह हो गई थी) से बेदखल होने और इकोलॉजिकल नुकसान की चिंताओं के बीच इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाया है।
6 जजों की स्पेशल बेंच में कौन-कौन शामिल
जस्टिस श्रीवास्तव की अगुवाई वाली स्पेशल बेंच में ज्यूडिशियल मेंबर जस्टिस दिनेश कुमार सिंह, जस्टिस अरुण कुमार त्यागी और एक्सपर्ट मेंबर ए सेंथिल वेल, अफरोज अहमद और ईश्वर सिंह शामिल हैं। ट्रिब्यूनल ने माना कि न तो प्रोजेक्ट के स्ट्रेटेजिक महत्व को नकारा जा सकता है और न ही आइलैंड कोस्टल रेगुलेशन जोन (ICRZ) नोटिफिकेशन की शर्तों को नजरअंदाज किया जा सकता है। इसने इस मुद्दे को ऐसे बनाया, जिसके लिए “बैलेंस्ड अप्रोच” की जरूरत थी।
सरकार को माननी होंगी शर्तें
NGT ने अपने ऑर्डर में कहा कि उसे एनवायरनमेंटल क्लीयरेंस में “काफी सेफगार्ड” मिले और प्रोजेक्ट के क्लीयरेंस में दखल देने का कोई अच्छा आधार नहीं मिला। एनजीटी ने दर्ज किया कि लेदरबैक समुद्री कछुए, निकोबार मेगापोड, खारे पानी के मगरमच्छ, रॉबर केकड़ा, निकोबार मकाक और ग्रेट निकोबार आइलैंड के दूसरे एंडेमिक पक्षी प्रजातियों की सुरक्षा के लिए खास शर्तें तय की गई थीं। ट्रिब्यूनल ने कहा कि सरकार एनवायरनमेंटल क्लीयरेंस की शर्तों से बंधी है और उसे ये सुनिश्चित करना होगा कि इनका उल्लंघन न हो।
रेतीले बीच को नहीं होना चाहिए नुकसान
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने सरकार को ये पक्का करने का निर्देश दिया है कि प्रोजेक्ट के प्रस्तावित कंस्ट्रक्शन में फोरशोर डेवलपमेंट से प्रोजेक्ट एरिया के पास और सभी आइलैंड पर कटाव, शोरलाइन में बदलाव न हो। इसमें कहा गया है कि द्वीप के किनारे को सुरक्षित रखा जाएगा ताकि रेतीले बीच को कोई नुकसान न हो, क्योंकि ये बीच द्वीपों की सुरक्षा के अलावा कछुओं और पक्षियों के लिए घोंसले बनाने की जगह भी देते हैं।
भारत के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों है ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट
ग्रेट निकोबार मेगा प्रोजेक्ट भारत के लिए रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण और जरूरी है। इससे, हिंद महासागर में भारत और भी ज्यादा ताकतवर बनेगा। ग्रेट निकोबार द्वीप मलक्का जलडमरूमध्य से काफी करीब है। इतना ही नहीं, ये दुनिया के सबसे बिजी समुद्री व्यापार रूटों में से एक है। लिहाजा, इस जगह की मदद से भारत ग्लोबल सप्लाई चेन का एक प्रमुख हिस्सा बन जाएगा। मिलिट्री की तैनाती के लिहाज से ये जगह भारत के लिए बहुत अहम है, जहां से देश को हिंद महासागर में चीनी जहाजों और पनडुब्बियों पर पैनी नजर बनाने में आसानी होगी। किसी भी तरह की आपदा और युद्ध जैसी परिस्थितियों में भारत को इस जगह से न सिर्फ जबरदस्त ताकत मिलेगी बल्कि इस जगह से दुश्मन पर नजर रखना और हमला करने- दोनों में काफी मदद भी मिलेगी।



































